Rummy Card Rules | Khelplay Rummy Apps Download

(Rummy) - Rummy Card Rules Show the house who's the boss, Tips And Tricks To Play Rummy let's play the gambling platform. सैचुरेशन की स्‍थिति का मतलब है कि बाघों के कुछ आवास या संरक्षित क्षेत्र चरम क्षमता तक पहुंच गए हैं। यानी इन जगहों पर फिलहाल जितने बाघ हैं, उतने ही यहां रह सकते हैं। ग्लोबल टाइगर फोरम के मुताबिक भारत में अब अतिरिक्त 1,000 से लेकर 1200 बाघों तक को ही रखा जा सकता है। अब यहां 10 हजार बाघों को नहीं रखा जा सकता, ऐसा करीब एक सदी पहले होता था। हालांकि उन क्षेत्रों में अतिरिक्त बाघों को रखा जा सकता है, जहां अब बाघ नहीं हैं।

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चम्पा/ चंपा को अंग्रेजी में प्लूमेरिया कहते हैं। इसे कनक चंपा, मुचकुंद तथा पद्म पुष्प भी कहते हैं। चम्पा के खूबसूरत, मन्द, सुगन्धित हल्के सफेद, पीले फूल होते हैं। चंपा मुख्यत: 5 प्रकार की होती है:- 1.सोन चंपा, 2.नाग चंपा, 3.कनक चंपा, 4. सुल्तान चंपा और कटहरी चंपा। सभी तरह की चंपा एक से एक अद्भुत और सुंदर होती है और इनकी सुगंध तो मन प्रसन्न कर देती है। चम्पा में पराग नहीं होता है। इसलिए इसके पुष्प पर मधुमक्खियां कभी भी नहीं बैठती हैं। 1. चंपा के फूल अक्सर पूजा में उपयोग किए जाते हैं। 2. चंपा का वृक्ष मन्दिर परिसर और आश्रम के वातावरण को शुद्ध करने के लिए लगाया जाता है। 3. चंपा के वृक्षों का उपयोग घर, पार्क, पार्किग स्थल और सजावटी पौधे के रूप में किया जाता है। 4. देवी मां ललिता अम्बिका के चरणों में भी चंपा के फूल को अन्य फूलों जैसे- अशोक, पुन्नाग के साथ सजाया जाता है। 5. चंपा का वृक्ष वास्तु की दृष्टि से सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। 6. चंपा को कामदेव के पांच फूलों में गिना जाता है। इसकी सुगंध से मन खुश हो जाता है। 7. चंपा के फूलों का तेल भी बनता है। 8. चंपा के फूलों के इत्र भी बनता है। 9. इसके फूल और वृक्षों के उपयोग औ‍षधि के रूप में भी होता है। 10. वास्तु के अनुसार, चंपा आपके घर में प्राण ऊर्जा लाने के लिए सबसे अच्छा पौधा है। 11. अपने जीवन में शुभ ऊर्जाओं को आमंत्रित करने के लिए आप इसे बालकनी के दरवाजे, मुख्य दरवाजे और बरामदे के पास रख सकते हैं। 12. कहीं पढ़ा था कि चंपा फूल की पांच पंखुड़ियां ईमानदारी, विश्वास, भक्ति, महत्वाकांक्षा और समर्पण का प्रतिनिधित्व करती हैं। चंपा के औषधीय गुण आयुर्वेद के अनुसार, चम्पा के औषधीय गुण से सिर दर्द, कान दर्द, आंखों की बीमारियों में फायदा ले सकते हैं। मूत्र रोग, पथरी या बुखार होने पर भी चम्पा के औषधीय गुण से लाभ मिलता है। सिर दर्द में चम्पा के फूल के इस्तेमाल से फायदे मिलते हैं। चंपा फूल के तेल को सिर पर लगाएं। इसे लगाने से सिर दर्द कम होता है। सूखी खांसी से परेशान हैं तो चम्पा के औषधीय गुण से फायदा ले सकते हैं। चम्पा की छाल का 1-2 ग्राम चूर्ण बना लें। इसमें शहद मिलाकर चाटने से सूखी खांसी खत्म हो जाती है। कई लोगों का मानना है कि इसे घर के भीतर नहीं लगाना चाहिए। लेकिन इसके खुशबूदार फूल सकारात्मक ऊर्जा छोड़ते हैं। इसलिए इसे लगाना शुभ है। इस पौधे को उत्तर पश्चिम दिशा में लगाना शुभ है। Rummy Card Rules, मुख्यमंत्री ‌शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में कुछ जगह धर्मांतरण के कुचक्र चल रहे हैं लेकिन हम उनको कामयाब नहीं होने देंगे। पूरे प्रदेश में हमने जांच के भी निर्देश दिए विशेषकर जो शिक्षण संस्थान हैं, चाहे मदरसे चलते हों अगर गलत ढंग से शिक्षा भी दी जा रही होगी तो हम उसको भी चेक करेंगे।

Sushmita Sen: बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्‍मिता सेन की वेब सीरीज 'आर्या' के दोनों सीजन सुपरहिट रहे है। इस सीरीज में सुष्मिता ने अपनी दमदार अदाकारी से खूब तारीफे बटोरी हैं। वहीं अब जल्द ही 'आर्या' का तीसरा सीजन आ रहा है। सुष्मिता सेन ने 'आर्या 3' की शूटिंग भी पूरी कर ली है। Rummy Your Chance To Win - Play Now! let's play the gambling platform Kamdhenu gay ki murti rakhne ke fayde : प्राचीनकाल में कामधेनु नामक एक गाय होती थी जो व्यक्ति की सभी तरह की कामना या मनोकामना पूर्ण कर देती थी। इस गाय को बहुत ही पवित्र माना जाता है। इसे समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों में से एक माना जाता है। बहुत से घरों में बछड़े नंदिनी को दूध पिला रही कामधेनु गाय की पीतल की मूर्ति होती है। आखिर इस मूर्ति को कब, कहां और कैसे रखना चाहिए यह भी जानना जरूरी है तभी इसका लाभ मिल सकता है। कामधेनु गाय की मूर्ति कब रखें घर में? कामधेनु गाय की मूर्ति आप किसी भी शुभ वार के दिन शुभ मुहूर्त में घर लाकर रख सकते हैं। गोपद्वमव्रत, गोवत्सद्वादशी व्रत, गोवर्धन पूजा, गोत्रि-रात्र व्रत, गोपाअष्टमी, पयोव्रत, धनतेरस के पावन व्रत त्योहार पर भी इसे घर में लाकर रख सकते हैं। इसके अलावा आप चाहें तो किसी पंडित या ज्योतिष की सलाह के अनुसार भी किसी शुभ मुहूर्त में यह मूर्ति लाकर रख सकते हैं। कामधेनु गाय की मूर्ति कहां और कैसे रखें? मूर्ति को घर की उत्तर, ईशान या पूर्व दिशा में स्थापित करना चाहिए। घर के पूजाघर या प्रवेश द्वार पर उचित स्थान पर इसे स्थापित कर सकते हैं। चांदी, पीतल या तांबे की मूर्ति रखना चाहिए। प्रवेश द्वार पर रख रहे हैं तो संगमरमर की मूर्ति रखें। कामधेनु गाय की मूर्ति रखने के फायदे:

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adipurush: साउथ सुपरस्टार प्रभास की फिल्म 'आदिपुरुष' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हाल ही में मेकर्स ने इस फिल्म का दूसरा ट्रेलर रिलीज किया है, जो एक्शन से भरपूर है। इस ट्रेलर में राघव और रावण के बीच युद्ध दिखाया गया है। यह फिल्म 16 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। Khelplay Rummy Apps Download, पारामारिबो। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने घोषणा की है कि भारत ने सूरीनाम में मूल भारतीय प्रवासियों के 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' (ओसीआई) कार्ड के लिए पात्रता मानदंड को 4थी से 6ठी पीढ़ी तक बढ़ाने का फैसला किया है, जो 150 साल पुराने द्विपक्षीय संबंधों में उनके महत्व को दर्शाता है। मुर्मू ने सोमवार को यहां इंडिपेंडेंस स्क्वायर पर एक समारोह को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। इससे पहले सूरीनाम के अपने समकक्ष चंद्रिका प्रसाद संतोखी के साथ वे सूरीनाम में भारतीयों के आगमन के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक सांस्कृतिक समारोह की गवाह बनीं। विदेश में बसे और वहां की नागरिकता ले चुके भारतीय लोगों के लिए ओसीआई कार्ड की सुविधा प्रदान की गई है। उल्लेखनीय है कि 452 भारतीय मजदूरों को लेकर 5 जून, 1873 को पहला जहाज 'लल्ला रुख' सूरीनाम की राजधानी पारामारिबो पहुंचा था। इनमें ज्यादातर मजदूर पूर्वी उत्तरप्रदेश और बिहार के रहने वाले थे। मुर्मू ने कहा कि आज इस ऐतिहासिक अवसर पर मुझे इस मंच पर यह घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मेरी सरकार ने ओसीआई कार्ड के लिए पात्रता मानदंड को 4थी से 6ठी पीढ़ी तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि ओसीआई कार्ड को भारत के साथ उनके 150 साल पुराने संबंधों की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से भारत के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने के प्रयास जारी रखने का आग्रह किया। इससे पहले ओसीआई सुविधा भारत से सूरीनाम पहुंचे समुदाय के मूल पूर्वजों की केवल 4 पीढ़ियों तक के लिए ही थी। नतीजतन 5वीं और बाद की पीढ़ियों से संबंधित समुदाय के कई युवा सदस्य इस लाभ से वंचित थे। मुर्मू ने कहा कि हम सभी सूरीनाम में भारतीयों के आगमन की 150वीं वर्षगांठ मनाने के लिए आज यहां एकत्र हुए हैं, जो सूरीनाम के इतिहास में मील का एक महत्वपूर्ण पत्थर है। इस अवसर पर मैं अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं और उन लोगों को सलाम करती हूं जिन्होंने इस राष्ट्र के निर्माण में मदद की। उन्होंने कहा कि एक बहुसांस्कृतिक समाज और अवसरों की भूमि के रूप में सूरीनाम ने उन सभी विभिन्न समुदायों का स्वागत किया है, जो यहां आए और बस गए। उन्होंने कहा कि इन वर्षों के दौरान विविध समुदाय एक परिवार और एक देश के रूप में विकसित हुए। उन्होंने एकता और समावेशिता के प्रति समर्पण और प्रतिबद्धता के लिए सूरीनाम के लोगों की सराहना भी की। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि विशाल भौगोलिक दूरियों, विभिन्न समय क्षेत्रों और सांस्कृतिक विविधता के बावजूद भारतीय प्रवासी हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत अपनी विविधता के लिए जाना जाता है और दोनों देशों के बीच बहुत सारी समानताएं भी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के समाज में बहुत आसानी से मिल-जुल सकते हैं। मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं अपने घर पर हूं। उन्होंने कहा कि पिछले 150 वर्षों में भारतीय समुदाय न केवल सूरीनाम में समाज का एक अभिन्न अंग बन गया है, बल्कि यह भारत और सूरीनाम के बीच गहरी साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ भी है। राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे समय में जब सूरीनाम अपने पूर्वजों की विरासत और भारत के साथ अपने संबंधों का जश्न मना रहा है, भारत एकजुटता और श्रद्धा के साथ सूरीनाम के साथ खड़ा है। सूरीनाम और भारत दोनों ने औपनिवेशिक शासन की लंबी अवधि के बाद अपनी अर्थव्यवस्थाओं और सामाजिक प्रणालियों के पुनर्निर्माण के लिए प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने दोनों देशों के बीच एकजुटता की भावना पैदा की है। मुर्मू ने कहा कि भारत-सूरीनाम द्विपक्षीय संबंध विकास की साझा आकांक्षाओं पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भारतीय समुदाय इस संबंध को मजबूत करना जारी रखेगा और आप में से प्रत्येक व्यक्ति दोनों देशों को जोड़ते हुए भारत और सूरीनाम के बीच एक पुल के रूप में काम करता रहेगा। इस अवसर पर मैं आप सभी को भारत आने, भारत की विकास यात्रा देखने और उसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित करती हूं। इससे पहले सोमवार को राष्ट्रपति ने बाबा और माई स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। बाबा और माई स्मारक सूरीनाम में पहली बार पैर रखने वाले पहले भारतीय पुरुष और महिला का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करता है। इसके बाद उन्होंने मामा श्रनन स्मारक में सम्मान व्यक्त किया। इस स्मारक में एक महिला अपने 5 बच्चों को लिए हुए है। इस महिला को सूरीनाम की मां मामा श्रनन तथा पांचों बच्चों को सूरीनाम की 5 विशेषताओं का प्रतीक माना जाता है। मुर्मू ने सूरीनाम के राष्ट्रपति द्वारा उनके सम्मान में आयोजित दोपहर के भोज में भी भाग लिया। इस दौरान अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने एक समावेशी विश्व व्यवस्था के लिए भारत के उस दृष्टिकोण को रेखांकित किया, जो हर देश और क्षेत्र के वैध हितों और चिंताओं के प्रति संवेदनशील है। मुर्मू 3 दिवसीय राजकीय यात्रा पर रविवार को सूरीनाम पहुंचीं। पिछले साल जुलाई में पदभार संभालने के बाद यह उनकी पहली राजकीय यात्रा है।(भाषा) Edited by: Ravindra Gupta

Bet Your Way to Big Wins! Rummy कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बजरंग दल पर बैन लगाने पर बैकफुट पर आई कांग्रेस को अब मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बजरंग सेना का साथ मिल गया है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में बजरंग सेना का पार्टी में विधिवत विलय गया है। इस मौके पर पूरा कांग्रेस कार्यालय भगवामय नजर आया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने जय जय श्री राम के नारे लगाए। बजरंग सेना के अध्यक्ष रघुनंदन शर्मा ने कार्यकर्ताओं के साथ कमलनाथ को गदा भेंट किया। गुजरात के प्रसिद्ध कॉर्डियोलॉजिस्ट की हार्ट अटैक से मौत सुबह ड्यूटी पर जाते वक्त आया हार्ट अटैक 41 साल के फिट डॉक्‍टर की थम गई दिल की धड़कनें कम उम्र में डरा रही दिल के दौरे की घटनाएं Heart attack in india: कोरोना और वैक्‍सीन के बाद आम लोगों में हार्ट अटैक के मामलों ने पहले ही दहशत में डाल रखा है। ऐसे में अगर किसी कॉर्डियोलॉजिस्ट की हार्ट अटैक से मौत हो जाए तो यह और ज्‍यादा चौंकाने वाली घटना है। गुजरात में जामनगर में ऐसा ही चौंका देने वाला मामला आया है। जामनगर में रहने वाले सौराष्ट्र के नामी ह्दय रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव गांधी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। 41 साल के गौरव गांधी को जामनगर समेत पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र में ह्दय रोग विशेषज्ञ के तौर पर जाने जाते थे।

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कोरिया ने खाता खुलने के बाद दूसरे क्वार्टर में आक्रामक रुख के साथ प्रवेश किया। हाफ टाइम से कुछ मिनट पहले भारत ने पलटवार करके कोरिया पर दबाव बनाना शुरू किया, लेकिन वे बराबरी करने में असमर्थ रहे। इस बीच, जियोन चोई (30') ने एक पेनल्टी कॉर्नर को पूरी सटीकता के साथ गोल में बदलते हुए कोरिया की बढ़त दोगुनी कर दी। Tips And Tricks To Play Rummy, अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। वेबदुनिया इसकी पुष्टि नहीं करता है। इनसे संबंधित किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

- शीतला अष्टमी के दिन अलसुबह जल्दी उठकर माता शीतला का ध्यान करें। - इस दिन व्रती को प्रातः कर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ व शीतल जल से स्नान करना चाहिए। - स्नान के पश्चात निम्न मंत्र से संकल्प लेना चाहिए- 'मम गेहे शीतलारोगजनितोपद्रव प्रशमन पूर्वकायुरारोग्यैश्वर्याभिवृद्धिये शीतलाष्टमी व्रतं करिष्ये' - संकल्प के पश्चात विधि-विधान तथा सुगंधयुक्त गंध व पुष्प आदि से माता शीतला का पूजन करें। - इस दिन महिलाएं मीठे चावल, हल्दी, चने की दाल और लोटे में पानी लेकर पूजा करती हैं। - पूजन का मंत्र- 'हृं श्रीं शीतलायै नम:' का निरंतर उच्चारण करें। - माता शीतला को जल अर्पित करें और उसकी कुछ बूंदे अपने ऊपर भी डालें। - इसके पश्चात ठंडे भोजन का भोग मां शीतला को अर्पित करें। - तत्पश्चात शीतला स्तोत्र का पाठ करें और कथा सुनें। - रोगों को दूर करने वाली मां शीतला का वास वट वृक्ष में माना जाता है, अतः इस दिन वट पूजन भी भी करना चाहिए। - शीतला माता की कथा पढ़ें तथा मंत्र- 'ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नम:' का जाप करें। - जो जल चढ़ाएं और चढ़ाने के बाद जो जल बहता है, उसमें से थोड़ा जल लोटे में डाल लें। यह जल पवित्र होता है। इसे घर के सभी सदस्य आंखों पर लगाएं। - पूजन के पश्चात थोड़ा जल घर लाकर हर हिस्से में छिड़कने से घर की शुद्धि होती है। - शीतला सप्तमी या अष्टमी व्रत का पालन जिस घर में किया जाता है, वहां सुख, शांति हमेशा बनी रहती है तथा रोगों से निजात भी मिलती है। मंत्र (रोग दूर करने का)- 'वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बरराम्‌, मार्जनीकलशोपेतां शूर्पालंकृतमस्तकाम्‌।' अर्थात्- मैं गर्दभ पर विराजमान, दिगंबरा, हाथ में झाडू तथा कलश धारण करने वाली, सूप से अलंकृत मस्तक वाली भगवती शीतला की वंदना करता/करती हूं। शीतलाष्टमी कथा : Shitala Mata Katha शीतला माता की कथा के अनुसार एक बार एक राजा के इकलौते पुत्र को शीतला (चेचक) निकली। उसी के राज्य में एक काछी-पुत्र को भी शीतला निकली हुई थी। काछी परिवार बहुत गरीब था, पर भगवती का उपासक था। वह धार्मिक दृष्टि से जरूरी समझे जाने वाले सभी नियमों को बीमारी के दौरान भी भली-भांति निभाता रहा। घर में साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखा जाता था। नियम से भगवती की पूजा होती थी। नमक खाने पर पाबंदी थी। सब्जी में न तो छौंक लगता था और न कोई वस्तु भुनी-तली जाती थी। गरम वस्तु न वह स्वयं खाता, न शीतला वाले लड़के को देता था। ऐसा करने से उसका पुत्र शीघ्र ही ठीक हो गया। उधर जब से राजा के लड़के को शीतला का प्रकोप हुआ था, तब से उसने भगवती के मंडप में शतचंडी का पाठ शुरू करवा रखा था। रोज हवन व बलिदान होते थे। राजपुरोहित भी सदा भगवती के पूजन में निमग्न रहते। राजमहल में रोज कड़ाही चढ़ती, विविध प्रकार के गर्म स्वादिष्ट भोजन बनते। सब्जी के साथ कई प्रकार के मांस भी पकते थे। इसका परिणाम यह होता कि उन लजीज भोजनों की गंध से राजकुमार का मन मचल उठता। वह भोजन के लिए जिद करता। एक तो राजपुत्र और दूसरे इकलौता, इस कारण उसकी अनुचित जिद भी पूरी कर दी जाती। इस पर शीतला का कोप घटने के बजाय बढ़ने लगा। शीतला के साथ-साथ उसे बड़े-बड़े फोड़े भी निकलने लगे, जिनमें खुजली व जलन अधिक होती थी। शीतला की शांति के लिए राजा जितने भी उपाय करता, शीतला का प्रकोप उतना ही बढ़ता जाता। क्योंकि अज्ञानतावश राजा के यहां सभी कार्य उलटे हो रहे थे। इससे राजा और अधिक परेशान हो उठा। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि इतना सब होने के बाद भी शीतला का प्रकोप शांत क्यों नहीं हो रहा है। एक दिन राजा के गुप्तचरों ने उन्हें बताया कि काछी-पुत्र को भी शीतला निकली थी, पर वह बिलकुल ठीक हो गया है। यह जानकर राजा सोच में पड़ गया कि मैं शीतला की इतनी सेवा कर रहा हूं, पूजा व अनुष्ठान में कोई कमी नहीं, पर मेरा पुत्र अधिक रोगी होता जा रहा है जबकि काछी पुत्र बिना सेवा-पूजा के ही ठीक हो गया। इसी सोच में उसे नींद आ गई। श्वेत वस्त्र धारिणी भगवती ने उसे स्वप्न में दर्शन देकर कहा- 'हे राजन्‌! मैं तुम्हारी सेवा-अर्चना से प्रसन्न हूं। इसीलिए आज भी तुम्हारा पुत्र जीवित है। इसके ठीक न होने का कारण यह है कि तुमने शीतला के समय पालन करने योग्य नियमों का उल्लंघन किया। तुम्हें ऐसी हालत में नमक का प्रयोग बंद करना चाहिए। नमक से रोगी के फोड़ों में खुजली होती है। घर की सब्जियों में छौंक नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इसकी गंध से रोगी का मन उन वस्तुओं को खाने के लिए ललचाता है। रोगी का किसी के पास आना-जाना मना है क्योंकि यह रोग औरों को भी होने का भय रहता है। अतः इन नियमों का पालन कर, तेरा पुत्र अवश्य ही ठीक हो जाएगा।' विधि समझाकर देवी अंतर्ध्यान हो गईं। प्रातः से ही राजा ने देवी की आज्ञानुसार सभी कार्यों की व्यवस्था कर दी। इससे राजकुमार की सेहत पर अनुकूल प्रभाव पड़ा और वह शीघ्र ही ठीक हो गया। इसी दिन भगवान श्री कृष्ण और माता देवकी का विधिवत पूजन करके मध्यकाल में सात्विक पदार्थों का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से पुण्य ही नहीं मिलता बल्कि समस्त दुखों का भी निवारण होता है। ऐसा सप्तमी-अष्टमी तिथि शीतला माता के पूजन का विधान है। Rummy 101 Pool तुला- तुला राशि वाले जातकों के लिए यह माह मिश्रित फल वाला रहेगा। व्यापार अच्छा चलेगा। कृषि क्षेत्र में मध्यम सफलता मिलेगी। नौकरी में प्रशंसा प्राप्त होगी। माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा। आपके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी बढ़ेगी, साथ ही आर्थिक विकास में रुकावट आएगी। माता-पिता से आर्थिक सहयोग प्राप्त होगा। दिनांक 12, 30 शुभ हैं, 19 अशुभ है। गणेशजी की आराधना लाभप्रद रहेगी।